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राम्या कृष्णन की अनसुनी कहानी: नीलांबरी से शिवगामी बनने तक का सफर

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 राम्या कृष्णन: जब एक अभिनेत्री ने नायिका से खलनायिका और फिर ‘शिवगामी’ तक का सफर तय किया नीलांबरी से शिवगामी तक! कुछ कलाकार पर्दे पर सिर्फ किरदार नहीं निभाते, वे उस किरदार की पहचान बन जाते हैं। राम्या कृष्णन का नाम ऐसी ही अभिनेत्रियों में लिया जाता है। कभी वह दक्षिण भारतीय फिल्मों की ग्लैमरस लीडिंग लेडी बनीं, कभी राजीव गांधी? Wait. Need no errors. Let's formulate. आज जब हिंदी और दक्षिण भारतीय सिनेमा की सीमाएं तेजी से मिट रही हैं, राम्या कृष्णन का करियर याद दिलाता है कि पैन-इंडिया स्टारडम कोई नया विचार नहीं है। उन्होंने तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और हिंदी फिल्मों में काम किया और कई दशकों तक अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। लेकिन राम्या कृष्णन की कहानी सिर्फ सफलता की कहानी नहीं है। इसमें शुरुआती असफलताएं हैं, अपने अभिनय को लेकर खुद की आलोचना है, एक ऐसे दौर की बेचैनी है जब एक अभिनेत्री को अपनी जगह बनाए रखने के लिए अलग-अलग तरह के किरदार स्वीकार करने पड़ते थे—और फिर एक ऐसा मोड़ आया जिसने उनके पूरे करियर की दिशा बदल दी। वह मोड़ था ‘पड़यप्पा’ की नीलांबरी  और वर्षों बाद वही अभिनेत्...

CINTAA विवाद में नया मोड़, FWICE की भूमिका पर वकील A.S. Peerzada ने उठाए सवाल

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 CINTAA विवाद में नया मोड़, FWICE की भूमिका पर वकील A.S. Peerzada ने उठाए सवाल CINTAA में घमासान! FWICE पर उठे सवाल फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में कलाकारों के अधिकारों और हितों की आवाज उठाने वाली संस्था CINTAA यानी Cine and TV Artistes' Association इन दिनों खुद एक बड़े विवाद के केंद्र में है। मामला सिर्फ कुछ पदाधिकारियों के बीच मतभेद तक सीमित नहीं रह गया है। संगठन के बैंक खाते फ्रीज होने, कई Executive Committee सदस्यों के इस्तीफे, CAWT को लेकर मतभेद और चुनाव प्रक्रिया को लेकर कानूनी सवालों ने पूरे मामले को पेचीदा बना दिया है। अब इस विवाद में एक और अहम सवाल सामने आया है— क्या CINTAA के आंतरिक मामलों और चुनाव प्रक्रिया में FWICE की भूमिका होनी चाहिए? CINTAA की ओर से मामले को देख रहे वकील A.S. Peerzada ने FWICE के हस्तक्षेप के तरीके पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाता है, इस पर फिल्म और टीवी इंडस्ट्री की नजर बनी हुई है। CINTAA में आखिर चल क्या रहा है? CINTAA लंबे समय से फिल्म और टेलीविजन कलाकारों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण संस्था रही है। लेकिन पि...

Last Man In Tower Movie Reviews: एक घर, करोड़ों का लालच और अकेले खड़े एक आदमी की लड़ाई, मनोज बाजपेयी ने फिर जीता दिल

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Last Man In Tower Movie Reviews: एक घर, करोड़ों का लालच और अकेले खड़े एक आदमी की लड़ाई, मनोज बाजपेयी ने फिर जीता दिल एक घर... करोड़ों का ऑफर! Last Man In Tower Movie Reviews: जब पूरा शहर आगे बढ़ना चाहता है, लेकिन एक आदमी पीछे हटने से इनकार कर दे... मुंबई में एक पुरानी इमारत है। उसके ज्यादातर निवासी बेहतर जिंदगी का सपना देख रहे हैं। सामने एक ऐसा ऑफर आता है जिसे ठुकराना आसान नहीं। लेकिन उसी इमारत में रहने वाला एक आदमी कहता है— नहीं। यहीं से शुरू होती है Last Man In Tower की असली कहानी। मनोज बाजपेयी, दिव्या दत्ता और बोमन ईरानी जैसे दमदार कलाकारों से सजी यह फिल्म 11 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। फिल्म का निर्देशन बेन रेखी ने किया है और इसकी कहानी अरविंद अडिगा के चर्चित उपन्यास पर आधारित है। फिल्म का सबसे दिलचस्प सवाल है— घर की कीमत कितनी है? जितने पैसे कोई देने को तैयार हो, या फिर उसमें बीती पूरी जिंदगी की यादें भी जुड़ी होती हैं? और यही सवाल धीरे-धीरे एक साधारण संपत्ति विवाद को रिश्तों, लालच, अकेलेपन और इंसानी मजबूरियों की कहानी बना देता है। कहानी कैसी है? — बिना स...

Haiwaan Movie Reviews: सैफ अली खान और अक्षय कुमार की फिल्म कैसी है? जानिए पूरी कहानी, एक्टिंग और दर्शकों का फैसला

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  Haiwaan Movie Reviews: सैफ अली खान और अक्षय कुमार की फिल्म कैसी है? जानिए पूरी कहानी, एक्टिंग और दर्शकों का फैसला अक्षय-सैफ की जोड़ी हुई पास? Haiwaan Movie Reviews: क्या सैफ और अक्षय की जोड़ी उम्मीदों पर खरी उतरी? कभी-कभी किसी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत उसकी कहानी नहीं, बल्कि उसके पीछे खड़े नाम होते हैं। ‘Haiwaan’ के साथ भी कुछ ऐसा ही है। एक तरफ अक्षय कुमार, दूसरी तरफ सैफ अली खान और निर्देशन की कमान प्रियदर्शन के हाथों में। ऊपर से करीब 17 साल बाद अक्षय और सैफ को एक साथ पर्दे पर देखने का मौका। ऐसे में फिल्म को लेकर दर्शकों की उम्मीदें स्वाभाविक रूप से काफी ज्यादा थीं। 11 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई यह फिल्म एक अपराध-रोमांचक कहानी के जरिए एक नेत्रहीन व्यक्ति और एक खतरनाक अपराधी के बीच संघर्ष को सामने रखती है। लेकिन बड़ा सवाल यही है— क्या ‘Haiwaan’ सिर्फ अपने सितारों के नाम पर चलती है या वाकई एक मजबूत रोमांचक फिल्म बन पाती है? शुरुआती समीक्षाओं को देखें तो जवाब पूरी तरह हां या ना में नहीं है। फिल्म में कुछ प्रभावशाली क्षण हैं, कलाकारों ने मेहनत की है, लेकिन पटकथा और...

अतुल कुलकर्णी की जीवनी: इंजीनियरिंग छोड़ बने अभिनेता, 2 नेशनल अवॉर्ड और ‘लाल सिंह चड्ढा’ की कहानी

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 अतुल कुलकर्णी: इंजीनियरिंग छोड़ थिएटर की राह चुनी, दो बार जीता नेशनल अवॉर्ड और फिर लिख दी ‘लाल सिंह चड्ढा’ की कहानी इंजीनियरिंग छोड़ी, बने नेशनल अवॉर्ड विनर! कभी-कभी जिंदगी हमें उस रास्ते पर ले जाती है, जिसकी हमने कल्पना तक नहीं की होती। इंजीनियर बनने की पढ़ाई कर रहा एक युवक अचानक अभिनय की दुनिया की तरफ मुड़ता है। फिर थिएटर में खुद को तराशता है, National School of Drama से प्रशिक्षण लेता है और आगे चलकर ऐसा अभिनेता बनता है, जिसकी पहचान किसी एक भाषा, किसी एक इंडस्ट्री या किसी एक तरह के किरदार तक सीमित नहीं रहती। यह कहानी है अतुल कुलकर्णी की। हिंदी सिनेमा में अतुल कुलकर्णी का नाम अक्सर उन कलाकारों में लिया जाता है, जो पर्दे पर आते हैं तो भले ही उनके पास फिल्म के सबसे ज्यादा सीन न हों, लेकिन उनका किरदार कहानी से निकलने के बाद भी दर्शक के जेहन में बना रहता है। ‘हे राम’, ‘चांदनी बार’, ‘रंग दे बसंती’, ‘नटरंग’, ‘द घाजी अटैक’, ‘राज़ी’, ‘रुद्र’ और ‘सिटी ऑफ ड्रीम्स’ जैसे प्रोजेक्ट्स ने उनके अभिनय की अलग-अलग परतें सामने रखीं। सबसे खास बात यह है कि अतुल कुलकर्णी सिर्फ अभिनेता नहीं हैं। उन...

अक्षय कुमार: एक्शन हीरो से ‘खिलाड़ी कुमार’ बनने तक की पूरी कहानी, संघर्ष, सफलता, शादी, विवाद और जिंदगी के अनसुने किस्से

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  अक्षय कुमार: एक्शन हीरो से ‘खिलाड़ी कुमार’ बनने तक की पूरी कहानी, संघर्ष, सफलता, शादी, विवाद और जिंदगी के अनसुने किस्से “खिलाड़ी कुमार की पूरी कहानी!” अक्षय कुमार—एक ऐसा नाम, जिसने बॉलीवुड में सिर्फ स्टारडम हासिल नहीं किया, बल्कि कई बार खुद को नए सिरे से गढ़ा बॉलीवुड में सितारे बहुत आए और बहुत चले गए। कुछ ने रोमांस से पहचान बनाई, कुछ ने एक्शन से, कुछ ने कॉमेडी से तो कुछ ने अपनी अदाकारी से इतिहास रचा। लेकिन अक्षय कुमार की कहानी थोड़ी अलग है। एक ऐसा लड़का, जिसने दिल्ली के चांदनी चौक से जिंदगी शुरू की, मार्शल आर्ट्स सीखी, फिल्मों में आने का सपना देखा और फिर एक समय ऐसा भी आया जब वही लड़का हिंदी सिनेमा के सबसे व्यस्त और भरोसेमंद सितारों में गिना जाने लगा। राजीव हरि ओम भाटिया के नाम से जन्मे इस अभिनेता ने 1991 में ‘सौगंध’ से बॉलीवुड में कदम रखा। मगर सिर्फ डेब्यू कर लेना स्टार बनने की गारंटी नहीं था। उनकी असली पहचान 1992 की ‘खिलाड़ी’ से बनी और यहीं से शुरू हुआ वह सफर, जिसने उन्हें ‘खिलाड़ी कुमार’ बना दिया। दिलचस्प बात यह है कि अक्षय की कहानी सिर्फ एक्शन और बॉक्स ऑफिस की कहानी न...

विज्ञान भवन से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक! क्यों बदला नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स का दशकों पुराना ठिकाना?

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विज्ञान भवन से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक! क्यों बदला नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स का दशकों पुराना ठिकाना? 72 साल बाद बड़ा बदलाव! दिल्ली नहीं, गुजरात में National Film Awards एक मंच खाली रहेगा, लेकिन इतिहास कहीं और लिखा जाएगा... कल्पना कीजिए... दिल्ली का विज्ञान भवन, जहां वर्षों से भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान का इंतजार होता रहा। वही मंच, वही औपचारिक माहौल और राष्ट्रपति के हाथों देश के बेहतरीन कलाकारों को मिलने वाला राष्ट्रीय सम्मान। लेकिन इस बार कहानी का दृश्य बदल रहा है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि 72वां नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह दिल्ली में क्यों नहीं होगा? असली सवाल यह है कि आखिर भारतीय सिनेमा के इस प्रतिष्ठित समारोह को गुजरात के एकता नगर तक ले जाने का फैसला क्यों इतना खास माना जा रहा है? क्या यह सिर्फ Venue Change है? क्या राष्ट्रीय आयोजनों की पुरानी भौगोलिक सीमाएं बदल रही हैं? और सबसे दिलचस्प बात—क्या स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की छाया में होने वाला यह समारोह भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा? 22 सितंबर 2026 को जब भारतीय सिनेमा के विजेता मंच पर पहुंचेंगे, तो उनके प...